​​ Livestock  & POultry Solutions

Poultry sector has been registered a robust growth in last few decades and emerged as a very promising allied agricultural activity in India. With its economic growth diseases associated with poultry has also been emerged. We have created this section to provide basic and latest scientific information to poultry farmers and entrepreneurs. In this section, we will deal with basics of poultry nutrition, diseases, feed supplements, management, housing, biosecurity, vaccination, immunity etc. 

पोल्ट्री फार्मिंग में संभावनाए: विश्व में और साथ साथ भारत में पोल्ट्री व्यवसाय बहुत तेज़ी के साथ बढ़ रहा है. यह भारतीय GDP का तकरीबन 0.8% से ज़यादा है, तेज़ी से बढ़ती हुई जनसंख्या और बढ़ती हुई माँस प्रोटीन की माँग इस व्यवसाय को खास तौर से बढ़ावा दे रही है. बढ़ती हुई दैनिक आय और खाने पीने की तरफ लोगो की रूचि भी इस व्यवसाय की उन्नति के लिए ज़िम्मेदार है. पोल्ट्री से हमे अंडे और माँस मिलता है. यह अनुमान है की विश्व में पोल्ट्री माँस की माँग 2022 (2013 की तुलना में) तक 47% तक बढ़ जाएगी read more
मुर्गियों में ई. कोलाई का संक्रमण सबसे आम, व्यापक रूप से प्रचलित और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है. इस बॅक्टीरिया को Avian Pathogenic Escherichia coli (APEC) भी कहते हैं.  यह एक दिन के चूज़े (yolk sac infection) से लेकर व्यस्क अंडा देती हुई मुर्गी (egg peritonitis) तक में होता है. यह सब बीमारियाँ मिलकर आर्थिक रूप से बड़ी हानि के लिए ज़िम्मेदार होती हैं.  यह बॅक्टीरिया निम्‍न बीमारियों में एक महत्वपूर्ण कारक read more
एक भ्रांति जो अमूमन मुर्गी पालन को लेकर लोगो में देखने को मिलती है वो यह है की वो समझते हैं की मुर्गियो में बीमारी रातो रात पूरे पूरे फार्मो को बर्बाद कर देती हैं जिसमे सब मुर्गियाँ मर जाती हैं. ये एक अफवाह हैं जिसमे कोई दम नही है. ये बात सत्य है की मुर्गियों में और जनवरो की बनिस्बत ज़्यादा बीमारी आती है पर उसे आमतौर पर आसानी से कंट्रोल कर लिया जाता है   read more
मैने अक्सर देखा है की गर्मी आते ही पोल्ट्री दवाई मार्केट में हीट स्ट्रेस प्रॉडक्ट्स की एक होड़ सी लग जाती है. इस बात का अनुमान लगाना काफ़ी मुश्किल हो जाता है की कौन सा उत्पाद कितना उपयोगी सिद्ध हो सकता है. पोल्ट्री फार्मर्स को भी ये भ्रम रहता है की क्या इस्तेमाल करें और क्या इस्तेमाल ना करें. इस बात से इनकार नही किया जा सकता की बहुत से उत्पाद सही मायनो में अच्छा प्रदर्शन करते हैं परंतु read more
ब्रायिलर पोल्ट्री फार्मिंग का स्कोप : सन 2016 में टाइम्स ऑफ इंडिया के सर्वेक्षण के अनुसार भारत की लगभग 70% आबादी (15वर्ष से अधिक आयु वाले) माँसाहारी है और इस बात का सबूत देश में तेज़ी से बढ़ता हुआ माँस का व्यवसाय है, जिसमे पोल्ट्री का एक ख़ास योगदान है. ब्रायिलर पक्षी माँस के लिए पाले जाते हैं जिसका उत्पादन देश में 8% प्रति वर्ष के हिसाब से बढ़ रहा है. लोगो की बढ़ती हुई आए और खाने पीने में अधिक प्रोटीन की मात्रा को सम्मिलित करने के लिए लोगो का ख़ास रुझान पोल्ट्री से प्राप्त होने वाले उत्पादो पर है जैसे ब्रायिलर माँस और अंडे. दूसरी तरफ रेड मीट (जो की बकरी या भैंस से प्राप्त होता है) को सेहत के लिए हानिकारक भी माना जाता है उसकी वजह से भी ब्रायिलर read more
लगभग 2500 साल पहले हिप्पोक्रेट नामक दार्शनिक ने यह बताया था की किसी शरीर में बीमारी का मुख्य कारण वातावरण में मौजूद हवा, पानी, जगह, मौसम आदि होते हैं. परंतु उन्नीस्वी सदी में जीवाणुओ की खोज से ये स्पष्ट हो गया की विभिन्न जीवाणु और कीटाणु बीमारी का मुख्य कारण होते हैं. मगर साथ ही इस बात की खोज भी हुई की शरीर में बीमारी की उत्पत्ति को वातावरण में उपस्थित कारक बढ़ावा देते हैं. इसे मोटे तौर पर इस तरह समझा जा सकता है जैसे वातावरण में तापमान बढ़ने की वजह से पक्षी स्ट्रेस में आते हैं जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity) कमज़ोर हो जाती है और शरीर जीवाणु संक्रमण की चपेट में आ जाता है.

यह कारक निम्न में से कोई भी हो सकते हैं: तापमान, आद्रता, लिट्टर में से निकलने वाली विभिन्न गैसे (मुख्य्त अमोनिया), धूल, हवा का बहाव, रोशनी, शोर, हवा दबाव इत्यादि.read more

Poultry Farming 

 

ई. कोलाई (E.coli) - एक ऐसा बेकटीरिया है जो आम तौर पर मुर्गियों की आँतो में पाया जाता है और अधिकतर कोई बीमारी पैदा नही करता. परंतु यह बात ध्यान देने योग्य है की आँतो में मिलने वाले ई. कोलाई में से 15% ऐसे होते हैं जो विपरीत परिस्थितियो में बीमारी पैदा करते है. ये बॅक्टीरिया अमूमन सांस लेने के तंत्र और आँतो की बीमारी करता है. परंतु पोल्ट्री के शरीर के दूसरे अंग इससे अछूते नही रहते.read more
परिचय: हीट स्ट्रेस मुर्गियो में एक प्रबंधन विफलता का उदाहरण है. इससे काफ़ी आर्थिक हानि होती है. वातावरण में जब गर्मी बढ़ती है तो उसके साथ साथ आद्रता भी बढ़ती है जो हीट स्ट्रेस को और घातक बना देती है. इससे मुर्गियों की उत्पादकता पर बहुत बुरा असर पड़ता है. मुर्गी का सामान्य तापमान 410C होता है जब वातावरण का तापमान 350C से अधिक होना शुरू होता है मुर्गियों की सामान्य शारीरिक स्थिति पर असर पड़ना शुरू हो जाता है जिससे read more